Lamhe

Blog Poems

गुज़रे हुए लम्हों को आज ज़ब मैंने मुड़ के देखा,
बंद पन्नों से जब धुल उड़ा देखा,
चाँद को देखा, कुछ सितारे देखे,
बारिश देखी, बादलों में छुपा आसमां देखा,
धुंधली तस्वीरों में छुपे इशारे देखे,
कुछ सपने थे, थीं कुछ यादें,
कुछ नम थीं, तो कुछ थे खुशियों के वादे,
टूटी हुई कसमें थीं तो कुछ पक्के इरादे,

गुज़रे हुए लम्हों को आज ज़ब मैंने मुड़ के देखा,
उस कल में कल की परछाई देखी,
इक मुक्कमिल राह  देखी, पैरों के कुछ निशान देखे,
आने वाले लम्हों की तस्वीर देखी,
इक चमकता सूरज और इक खुला आसमां देखा,
इक ख्वाब देखा, खुशियों से भरा एक जहाँ देखा,
बीतें लम्हों से निकल आज  मैंने आते हुए लम्हों को मुस्कुरा कर देखा।

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